नई दिल्ली: भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम करते हुए पहली बार Japan Open Super 750 का खिताब जीत लिया। फाइनल मुकाबले में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधु ने मेजबान जापान की तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से सीधे गेमों में हराकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ सिंधु Japan Open जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बन गई हैं।
दो साल से अधिक का खिताबी सूखा हुआ खत्म
यह खिताब सिंधु के लिए बेहद खास रहा क्योंकि उन्होंने दो साल से अधिक समय से चले आ रहे अपने खिताबी इंतजार को समाप्त किया। साथ ही, यह 2019 BWF World Championships के बाद उनका सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब माना जा रहा है। इस जीत ने आगामी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन सत्र से पहले उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है।
शुरुआत से ही दिखाया आक्रामक खेल
फाइनल मुकाबले में सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और पहले गेम में तेजी से बढ़त बनाई। हालांकि, अकाने यामागुची ने वापसी की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने लंबी रैलियों में धैर्य और नेट पर बेहतरीन नियंत्रण का प्रदर्शन करते हुए मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी। 17-17 की बराबरी के बाद उन्होंने लगातार महत्वपूर्ण अंक हासिल कर पहला गेम 21-17 से अपने नाम किया।
दूसरे गेम में भी नहीं दिया कोई मौका
दूसरे गेम में भी सिंधु ने शानदार लय बरकरार रखी और लगातार छह अंक जीतकर बढ़त बना ली। यामागुची ने स्कोर को करीब लाने की कोशिश की, लेकिन निर्णायक क्षणों में सिंधु ने संयम बनाए रखा। आखिरकार उन्होंने दूसरा गेम भी 21-17 से जीतकर मुकाबला और खिताब दोनों अपने नाम कर लिया। जीत के बाद सिंधु ने अपने कोच को गले लगाकर इस यादगार पल का जश्न मनाया।
यामागुची पर लंबे समय बाद मिली बड़ी जीत
यह मुकाबला सिंधु के लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह 2022 Thailand Open के बाद अकाने यामागुची के खिलाफ उनकी पहली पूर्ण मुकाबले वाली जीत है। इससे पहले इस साल Malaysia Open में दोनों आमने-सामने आई थीं, लेकिन यामागुची चोट के कारण मुकाबला पूरा नहीं कर सकी थीं।
भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ी उपलब्धि
पीवी सिंधु की इस जीत को भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। Japan Open जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में पहली भारतीय चैंपियन बनकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। यह सफलता आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी भारतीय चुनौती को और मजबूत करेगी।
