नई दिल्ली. राजस्थान में बदलता मौसम आने वाले दशकों में लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। एक नए Climate Study के मुताबिक प्रदेश में गर्मी का असर लगातार बढ़ने की संभावना है। आने वाले वर्षों में सिर्फ दिन का तापमान ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि गर्म रातों की संख्या में भी तेजी आ सकती है।
वहीं, राजस्थान में पिछले कुछ दशकों के दौरान Monsoon Rainfall में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन भविष्य में बारिश का Pattern अधिक अनिश्चित हो सकता है। यानी कहीं बहुत ज्यादा बारिश तो कहीं लंबे समय तक कम बारिश की स्थिति बन सकती है।
35°C से ऊपर रहने वाले दिनों की संख्या तेजी से बढ़ेगी
Council on Energy, Environment and Water (CEEW) के Climate Study में राजस्थान के बदलते मौसम की तस्वीर सामने आई है। संस्था ने बुधवार को जयपुर में आयोजित एक सेमिनार में राज्य के Weather Pattern और Climate Trends से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए।
अध्ययन के अनुसार 1981-2010 के दौरान राजस्थान में साल के औसतन 130 दिन ऐसे होते थे, जब अधिकतम तापमान 35°C से ऊपर रहता था। 2011-2024 के बीच यह संख्या बढ़कर 131 दिन हो गई।
लेकिन आने वाले दशकों में इसमें काफी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अनुमान के मुताबिक 2031-2050 के बीच साल में करीब 176 दिन अधिकतम तापमान 35°C से ऊपर रह सकता है। वहीं 2051-2070 के दौरान ऐसे दिनों की संख्या 185 तक पहुंचने का अनुमान है।
इसका मतलब है कि राजस्थान में आने वाले समय में Extreme Heat और Heatwave Risk बढ़ सकता है।
सिर्फ दिन नहीं, रातें भी होंगी ज्यादा गर्म
Climate Change का असर राजस्थान में रात के तापमान पर भी पड़ने की संभावना है। अध्ययन में 25°C से अधिक न्यूनतम तापमान वाले दिनों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है।
1981-2010 के दौरान ऐसे करीब 79 दिन दर्ज किए गए थे। 2011-2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 91 दिन हो गया।
आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है। अनुमान के मुताबिक 2031-2050 में 25°C से अधिक न्यूनतम तापमान वाले दिन करीब 132 और 2051-2070 में 139 तक पहुंच सकते हैं।
यानी राजस्थान में Hot Days के साथ Hot Nights की समस्या भी बढ़ सकती है। रात में तापमान अधिक रहने से लोगों को शरीर को राहत देने और गर्मी से उबरने में मुश्किल हो सकती है।
मानसून में अभी बढ़ी बारिश, लेकिन आगे बदल सकता है Pattern
राजस्थान में मानसून की कुल बारिश के आंकड़ों में पिछले कुछ दशकों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1981-2010 के दौरान प्रदेश में औसत Monsoon Rainfall करीब 471 मिलीमीटर थी।
2011-2024 में यह बढ़कर लगभग 598 मिलीमीटर हो गई। यानी इस अवधि में औसत मानसूनी बारिश में करीब 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, भविष्य के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। अध्ययन के अनुसार 2051-2070 के दौरान राजस्थान में औसत मानसूनी बारिश करीब 569 मिलीमीटर रहने का अनुमान है।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में चिंता सिर्फ Total Rainfall को लेकर नहीं होगी, बल्कि बारिश किस समय, कितनी तेजी और किस क्षेत्र में होती है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
कहीं Dry Spell तो कहीं Heavy Rainfall का खतरा
अध्ययन में राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में Climate Change के अलग-अलग प्रभावों की संभावना जताई गई है।
Western Rajasthan में आने वाले समय में लंबे Dry Spells और Dust Storms का खतरा बढ़ सकता है। कम बारिश और अधिक गर्मी के कारण इस क्षेत्र में सूखे जैसी परिस्थितियों का दबाव बढ़ने की आशंका है।
वहीं Eastern Rajasthan में गर्मी के साथ बढ़ती Humidity लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में मानसून के दौरान बारिश बढ़ने की संभावना जताई गई है।
इस तरह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर एक जैसा नहीं रहेगा।
खेती और Water Resources के सामने नई चुनौती
बदलता Rainfall Pattern राजस्थान की Agriculture और Water Resources Management के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यदि बारिश कम समय में बहुत ज्यादा होती है और फिर लंबे समय तक सूखा रहता है तो इसका सीधा असर खेती पर पड़ सकता है।
किसानों के लिए कभी Excess Rainfall तो कभी Water Scarcity जैसी स्थितियां समस्या पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा भूजल Recharge, सिंचाई व्यवस्था और पेयजल प्रबंधन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
ऐसे में आने वाले वर्षों में राजस्थान को Climate Resilience बढ़ाने, बेहतर Water Management और मौसम आधारित खेती की रणनीतियों पर ज्यादा जोर देना पड़ सकता है।
राजस्थान के मौसम में आने वाला है बड़ा बदलाव
Climate Study के आंकड़े संकेत देते हैं कि राजस्थान का Weather Pattern आने वाले दशकों में काफी बदल सकता है। एक ओर 35°C से ऊपर रहने वाले दिनों की संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है, तो दूसरी ओर रातों का तापमान भी ज्यादा रहने का अनुमान है।
मानसून में बारिश की कुल मात्रा में उतार-चढ़ाव के साथ उसका वितरण भी बदल सकता है। ऐसे में राजस्थान के लिए Climate Change Adaptation, Heat Action Plans, Water Conservation और Sustainable Agriculture आने वाले समय की अहम जरूरत बन सकते हैं।

