नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने स्थानीय स्वशासन और वित्तीय विकेंद्रीकरण को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य वित्त आयोगों (SFC) के लिए आवश्यक डाटासेट्स पर तैयार रिपोर्ट जारी कर दी है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार V. Anantha Nageswaran ने इस रिपोर्ट का विमोचन किया।
इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव Vivek Bharadwaj सहित मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी, शोध संस्थानों और नीति निर्धारण से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।
बेहतर डेटा से बेहतर शासन संभव
मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि नागरिकों को सरकार का अनुभव पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट और आंगनवाड़ी जैसी मूलभूत सेवाओं के माध्यम से होता है। इसलिए पंचायतों को मजबूत बनाना प्रभावी शासन की बुनियादी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय विकेंद्रीकरण का वास्तविक उद्देश्य शासन को लोगों के और करीब लाना है। राज्य वित्त आयोग तभी बेहतर सिफारिशें दे सकते हैं जब उनके पास विश्वसनीय, समयबद्ध और सूक्ष्म स्तर का डेटा उपलब्ध हो। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “बेहतर डेटा से बेहतर शासन सुनिश्चित होता है।”
73वें संविधान संशोधन के क्रियान्वयन का ऑडिट करने की सिफारिश
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी दिया गया है कि Comptroller and Auditor General of India (CAG) द्वारा राज्यों में 73वें संविधान संशोधन के क्रियान्वयन का प्रदर्शन ऑडिट किया जाए। इससे यह आकलन किया जा सकेगा कि पंचायतों को वित्तीय, प्रशासनिक और कार्यात्मक अधिकार किस स्तर तक सौंपे गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और संवैधानिक विकेंद्रीकरण को और मजबूती मिलेगी।
पंचायतों के लिए मजबूत डेटा तंत्र पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विवेक भारद्वाज ने कहा कि राज्य वित्त आयोगों और केंद्रीय वित्त आयोगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समय पर और विश्वसनीय डेटा उपलब्ध होने से राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में गोल्ड अवॉर्ड के लिए चुना गया है, जबकि इस वर्ष घोषित 16 पुरस्कारों में से चार पंचायतों से जुड़ी पहलों को मिले हैं।
पंचायतों को मिलेगा प्रदर्शन आधारित अनुदान
विवेक भारद्वाज ने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने पंचायतों के लिए 87 हजार करोड़ रुपये के प्रदर्शन आधारित अनुदान का प्रस्ताव रखा है। यह अनुदान पंचायतों की स्वयं की आय में कम से कम 2.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के आधार पर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता और क्षमता पर बढ़ते विश्वास का संकेत है।
शहरीकरण के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान
रिपोर्ट में तेजी से विकसित हो रहे अर्ध-शहरी क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 हजार करोड़ रुपये के ‘अर्बनाइजेशन प्रीमियम’ का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य उन स्थानीय निकायों को सहायता प्रदान करना है जो ग्रामीण से शहरी स्वरूप में परिवर्तित हो रहे हैं।
रिपोर्ट में क्या हैं प्रमुख सिफारिशें
रिपोर्ट में पंचायत स्तर पर वित्तीय डेटाबेस तैयार करने, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स के संकेतकों को राज्य वित्त आयोगों के उपयोग के अनुरूप वर्गीकृत करने, राज्य सरकारों में समर्पित SFC सेल स्थापित करने और लेखा प्रणाली को मानकीकृत करने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा राज्य वित्त आयोगों के लिए एक समान रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क, व्यापक डेटा हैंडबुक और भविष्य के आयोगों के लिए एक विस्तृत मैनुअल तैयार करने का भी सुझाव दिया गया है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट पंचायतों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने, स्थानीय निकायों को अधिक सक्षम बनाने और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार का मानना है कि मजबूत डेटा प्रणाली और प्रभावी वित्तीय विकेंद्रीकरण के जरिए ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
संविधान के तहत राज्य वित्त आयोगों की भूमिका
गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत राज्य वित्त आयोगों का गठन किया जाता है। इनका प्रमुख दायित्व पंचायतों और स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन करना तथा संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए सिफारिशें देना है।
इसी उद्देश्य को और प्रभावी बनाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने नवंबर 2024 में आयोजित वित्त आयोग सम्मेलन के बाद राज्य वित्त आयोगों के लिए मजबूत डेटा तंत्र विकसित करने की पहल शुरू की थी, जिसका परिणाम अब इस रिपोर्ट के रूप में सामने आया है।
