नई दिल्ली: अल नीनोके असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर देशभर में मानसून, बुवाई और फसलों की स्थिति का जायजा लिया। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि सरकार ने अप्रैल 2026 से ही संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारी शुरू कर दी थी, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
लगातार की जा रही है निगरानी
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अल नीनो निगरानी सेल, फसल-मौसम निगरानी समूह, राज्यों के कंट्रोल रूम और नियुक्त नोडल अधिकारियों के माध्यम से बुवाई, फसलों की स्थिति और बाजार पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन से चार दिनों में कई राज्यों में अच्छी बारिश हुई है, जिससे वर्षा की कमी वाले जिलों की संख्या घटकर 262 से 178 रह गई है। इससे कृषि गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
मानसून में देरी का बुवाई पर असर
कृषि मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष इसी समय तक करीब 442 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष मंगलवार तक लगभग 351 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है। उन्होंने कहा कि मानसून में देरी का असर खासतौर पर तूर (अरहर), सोयाबीन, कपास और कुछ अन्य खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है।
किसानों को दी गई यह सलाह
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की जरूरत वाली फसलों को प्राथमिकता दें। उन्होंने मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों की बुवाई करने की सलाह दी, क्योंकि ये फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं और पानी की भी अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है।
सरकार का दावा- हर स्थिति से निपटने की तैयारी
कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार मौसम की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसानों के हितों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि El Niño का प्रभाव बढ़ता है, तो उससे निपटने के लिए आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाएंगे, ताकि किसानों की फसल और कृषि उत्पादन पर कम से कम असर पड़े।

