नई दिल्ली. राजस्थान के स्कूलों में बच्चों को चीनी के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान और स्वस्थ खानपान के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके लिए राज्य के स्कूलों में ‘शुगर बोर्ड’ लगाए जाएंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने बुधवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इन बोर्ड के जरिए विद्यार्थियों को चीनी के सेवन, खाद्य पदार्थों में छिपी चीनी और इससे जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी दी जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों में खानपान की बेहतर आदतें विकसित करना और उन्हें पौष्टिक भोजन चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है।
जंक फूड और तली हुई चीजों से होने वाली समस्याओं पर रहेगा जोर
जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) गिरिराज पारीक के अनुसार, बच्चों में अस्वस्थ खानपान की आदतों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह पहल शुरू की जा रही है। खासतौर पर जंक फूड और तली हुई चीजों के अधिक सेवन को लेकर बच्चों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
स्कूलों में विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि भोजन का चुनाव उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास को किस तरह प्रभावित करता है। इसके साथ ही उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
प्रार्थना सभा और कक्षाओं में होंगी जागरूकता गतिविधियां
इस अभियान के तहत स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा और कक्षाओं के दौरान जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को चीनी के सेवन और पोषण के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी।
बच्चों को स्वस्थ विकल्प चुनने और अपने दैनिक खानपान में पौष्टिक चीजों को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल के जरिए कम उम्र से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
बाल अधिकार आयोग की सलाह के बाद उठाया गया कदम
स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने की पहल राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सलाह के बाद की जा रही है। आयोग ने बच्चों में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने, कुपोषण को रोकने और उनके समग्र विकास को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास करने की जरूरत बताई थी।
इसी दिशा में स्कूलों को बच्चों के बीच स्वस्थ खानपान के बारे में जानकारी साझा करने और बेहतर आदतें विकसित करने के लिए जागरूकता गतिविधियां चलाने पर जोर दिया जा रहा है।
