नई दिल्ली: Supreme Court of India ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे यह पहचानें कि UAPA मामलों के ट्रायल को हर हाल में 1 साल के भीतर पूरा करने के लिए कितनी विशेष अदालतों (स्पेशल कोर्ट्स) की जरूरत है।
4 हफ्ते में देना होगा जवाब
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करें कि UAPA मामलों की सुनवाई रोजाना (day-to-day basis) हो और हर केस एक साल के भीतर पूरा किया जाए। इसके लिए आवश्यक अदालतों की संख्या तय कर 4 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
हाई कोर्ट और एजेंसियों को भी निर्देश
कोर्ट ने संबंधित High Courts of India को निर्देश दिया कि इन अदालतों के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति सुनिश्चित करें। साथ ही National Investigation Agency, Central Bureau of Investigation और अन्य जांच एजेंसियों को हर कोर्ट के लिए कम से कम एक समर्पित पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
प्रॉसिक्यूटर की कमी पर विशेष व्यवस्था
जहां अभियोजकों की कमी है, वहां केंद्र और राज्य सरकारों को हाई कोर्ट से सलाह लेकर स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का सुओ मोटू मामला
यह आदेश सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुओ मोटू मामले की सुनवाई के दौरान दिया। यह मामला UAPA और MCOCA जैसे कानूनों के तहत लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए विशेष अदालतों के गठन से जुड़ा है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक-एक कोर्ट की सहमति
केंद्र सरकार के 7 जनवरी 2026 के ऑफिस मेमोरेंडम के आधार पर 17 राज्यों ने फिलहाल एक-एक एक्सक्लूसिव कोर्ट बनाने पर सहमति जताई है, जिसे केंद्र की वित्तीय सहायता मिलेगी।
जजों के मूल्यांकन के लिए अलग सिस्टम
कोर्ट ने यह भी कहा कि इन विशेष अदालतों में तैनात जजों के ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के मूल्यांकन के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए, क्योंकि वे सामान्य तरीके से यूनिट्स अर्जित नहीं कर पाएंगे।
पहले भी दे चुका है कोर्ट निर्देश
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार UAPA और अन्य विशेष कानूनों के मामलों के लिए अलग अदालतें बनाने पर जोर दे चुका है, ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
