नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन भाषा नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताई है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने खास तौर पर कक्षा 6 के छात्रों को इस नीति के तहत कुछ राहत देने की संभावना तलाशने को कहा। कोर्ट ने अंग्रेजी को गैर-मूल भाषा मानने के प्रावधान पर भी सवाल उठाते हुए इसके संवैधानिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर विचार करने की बात कही।
अंग्रेजी को ‘गैर-मूल भाषा’ मानने पर कोर्ट की आपत्ति
न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि अंग्रेजी को किस हद तक भारत में गैर-स्वदेशी भाषा माना जा सकता है, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने ‘native’ शब्द के इस्तेमाल पर भी व्यक्तिगत आपत्ति जताई और कहा कि इसकी जगह ‘indigenous’ शब्द अधिक उपयुक्त हो सकता है। कोर्ट के मुताबिक भारत में अंग्रेजी की ऐतिहासिक मौजूदगी और समाज में इसकी गहरी जड़ों को देखते हुए यह तय करना जरूरी होगा कि संवैधानिक दृष्टिकोण से इसे गैर-स्वदेशी भाषा माना जाए या स्वदेशी भाषा।
तीसरी भाषा लागू करने में स्कूलों के सामने चुनौतियां
इससे पहले संसदीय समिति ने भी कक्षा 6 से तीसरी भाषा लागू किए जाने को लेकर कई व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया था। समिति ने माना कि स्कूलों को language teachers की नियुक्ति, study materials की उपलब्धता और शिक्षकों की training के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया है। लोकसभा में पेश की गई वर्ष 2026-27 की Estimates Committee की दसवीं रिपोर्ट में CBSE और देश में affordable तथा quality education से जुड़े कई पहलुओं की समीक्षा की गई है।
शिक्षा मंत्रालय ने बहुभाषी शिक्षा के लिए उठाए कई कदम
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने शुरुआती कक्षाओं में mother tongue-based education और multilingualism को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर कई कदम उठाए हैं। तीन भाषा फॉर्मूला में बदलाव के साथ नया R1, R2, R3 language framework भी लागू किया गया है। इसके अलावा गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की किताबों को सभी 22 scheduled languages में उपलब्ध कराने के लिए अनुवाद का काम किया गया है। छात्रों को नए पाठ्यक्रम में आसानी से आगे बढ़ाने के लिए bridge courses और e-content भी तैयार किए गए हैं।
22 भाषाओं में ‘जादुई पिटारा’ और स्थानीय भाषा की सामग्री
शिक्षा मंत्रालय ने multilingual learning को बढ़ावा देने के लिए कई नए resources भी तैयार किए हैं। इनमें 22 भाषाओं में उपलब्ध Jaadui Pitara play-based learning kits, देशभर में भाषा से परिचय कराने वाला Bhasha Sangam programme और Central Institute of Indian Languages (CIIL) के सहयोग से तैयार किए गए 121 mother-tongue language primers शामिल हैं। केंद्रीय विद्यालयों जैसे संस्थानों में स्थानीय भाषाओं के शिक्षकों को contractual basis पर नियुक्त कर pedagogical support देने की व्यवस्था भी की गई है।
नीति लागू करने से पहले तैयारी की कमी पर सवाल
हालांकि, संसदीय समिति ने यह भी रेखांकित किया कि तीसरी भाषा लागू करने से पहले study material, teacher training और पर्याप्त language teaching staff जैसी जरूरतों का अनुमान पूरी तरह नहीं लगाया गया। ऐसे में Supreme Court की ओर से CBSE की three-language policy पर पुनर्विचार और कक्षा 6 के छात्रों को संभावित राहत देने का सुझाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इस मामले में CBSE को नीति के व्यावहारिक और संवैधानिक पहलुओं पर दोबारा विचार करना होगा।
