नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के भीतर संगठनात्मक चुनाव और पार्टी की ओर से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज्ड सिग्नेटरी) को लेकर चल रहा विवाद अब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने इस मामले में पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों और प्रतिदावों पर संज्ञान लेते हुए दोनों पक्षों से लिखित जवाब मांगा है।
निर्वाचन आयोग ने जारी बयान में कहा कि उसने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तथा पार्टी नेता रितब्रत बनर्जी को अलग-अलग पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में दोनों गुटों द्वारा संगठनात्मक चुनाव और पार्टी की ओर से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को लेकर किए गए दावों और प्रतिदावों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है।
चुनान आयोग ने दोनों पक्षों को दिए निर्देश
आयोग ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे सोमवार शाम 5:30 बजे तक अपना लिखित जवाब आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद आयोग दोनों पक्षों की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और तथ्यों की समीक्षा करेगा और आवश्यक होने पर आगे की कार्रवाई करेगा।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करने के अधिकार को लेकर विवाद सामने आया है। दोनों गुट अपने-अपने दावों को सही बताते हुए आयोग के समक्ष पहुंचे हैं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से औपचारिक जवाब तलब किया है।
ऐसे मामलों का निपटारा निर्वाचन चिन्ह (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश के तहत किया जाता है। इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग संबंधित गुटों के दावे, उनके समर्थन में पेश किए गए दस्तावेज, संगठनात्मक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण करता है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आयोग किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है।
निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि उसने फिलहाल किसी भी गुट के दावों की सत्यता या वैधता पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। आयोग ने कहा कि वह दोनों पक्षों से प्राप्त लिखित जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों का निष्पक्ष परीक्षण करने के बाद ही इस मामले में आगे का निर्णय लेगा।
चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों गुट आयोग के समक्ष क्या जवाब देते हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्वाचन आयोग आगे क्या फैसला करता है।

