नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय यानी Enforcement Directorate (ED) को बड़ा प्रशासनिक और मानव संसाधन विस्तार देने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय ने एजेंसी में 1,200 से ज्यादा नए पदों को मंजूरी दी है, जिससे ED की जांच क्षमता और Enforcement Power दोनों में बड़ा इजाफा माना जा रहा है।
इस फैसले के बाद ED में कर्मचारियों की कुल संख्या 2,029 से बढ़कर 3,256 हो जाएगी। यानी एजेंसी के Workforce में 60% से अधिक वृद्धि होगी। माना जा रहा है कि बढ़ते Money Laundering, Cyber Crime, AI Fraud और Cryptocurrency Investigation मामलों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
किन पदों पर होगी भर्ती?
सरकार ने कार्यपालिका, कानूनी और न्यायिक विभागों सहित छह अलग-अलग विभागों में कुल 1,227 नए पदों को मंजूरी दी है।
इनमें प्रमुख पद शामिल हैं:
सहायक प्रवर्तन अधिकारी
प्रवर्तन अधिकारी
सहायक निदेशक
जांच कर्मचारी
कानूनी अधिकारी
न्यायिक विभाग के कर्मचारी
अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में जांच अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी ताकि तेजी से बढ़ रहे मामलों की जांच समय पर पूरी हो सके।
2011 के बाद पहली बार हुआ बड़ा बदलाव
ED का पिछला Cadre Restructuring साल 2011 में हुआ था। पिछले डेढ़ दशक में Financial Crime Investigation का दायरा तेजी से बढ़ा है। अब एजेंसी को केवल Hawala या Money Laundering तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि यह एजेंसी अब इन मामलों की भी जांच कर रही है:
क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी
एआई-आधारित वित्तीय घोटाला
साइबर अपराध
अंतर्राष्ट्रीय धन शोधन
छद्म कंपनियां
सीमा पार वित्तीय लेनदेन
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फाइनेंशियल अपराधों में तेजी आने के कारण ED पर दबाव लगातार बढ़ रहा था।
PMLA मामलों में रिकॉर्ड कार्रवाई
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत ED की कार्रवाई में भारी वृद्धि दर्ज की गई।
मुख्य आंकड़े:
2,892 Search Operations और Raids
81,422 करोड़ रुपये की अस्थायी संपत्ति कुर्क
812 Chargesheets दाखिल
461 Provisional Attachment Orders जारी
पिछले वर्ष की तुलना में छापेमारी और जांच मामलों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। इससे साफ है कि एजेंसी का कार्यभार लगातार बढ़ रहा है।
ED पर बढ़ा राजनीतिक और सुरक्षा दबाव
इसी बीच Kerala में ED की छापेमारी के दौरान अधिकारियों पर हमले की घटना भी चर्चा में रही। पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी की कंपनी से जुड़े Financial Transaction Case में कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ED अधिकारियों के वाहनों पर हमला कर दिया।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि हाई-प्रोफाइल मामलों में जांच एजेंसियों पर सुरक्षा और राजनीतिक दबाव दोनों बढ़ रहे हैं।
क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ भर्ती प्रक्रिया नहीं बल्कि भारत की Financial Enforcement System को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
सरकार अब इन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर रही है:
वित्तीय पारदर्शिता
मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कार्रवाई
डिजिटल वित्तीय सुरक्षा
आर्थिक अपराधों की जांच
अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय निगरानी
आने वाले समय में AI और Crypto आधारित Financial Crime बढ़ने की संभावना को देखते हुए ED जैसी एजेंसियों की भूमिका और भी अहम मानी जा रही है।
बदलती जांच व्यवस्था की नई तस्वीर
भारत में Financial Crime Investigation तेजी से टेक्नोलॉजी आधारित हो रही है। ऐसे में सिर्फ पारंपरिक जांच तंत्र से काम नहीं चल सकता। इसी वजह से सरकार अब ED को तकनीकी रूप से सक्षम, ज्यादा संसाधनयुक्त और तेज कार्रवाई करने वाली एजेंसी के रूप में विकसित करना चाहती है। 15 साल बाद हुआ यह विस्तार उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
