नई दिल्ली. भारतीय संसद में आज से शुरू हो रहे विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जो देश की राजनीतिक संरचना में बड़े बदलाव ला सकते हैं। इन विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। इनका उद्देश्य लोकसभा सीटों का पुनर्गठन, उनकी संख्या बढ़ाना और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना है।
क्या हैं तीनों बिल?
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक
यह विधेयक 1971 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण का रास्ता साफ करेगा। इसे कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे। - परिसीमन विधेयक 2026
इस बिल के जरिए नए सिरे से परिसीमन कराया जाएगा और लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक किया जा सकता है। - केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026
इसे गृह मंत्री अमित शाह पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों और प्रशासनिक ढांचे को नए बदलावों के अनुरूप बनाना है।
महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी
इन विधेयकों का सीधा संबंध नारी शक्ति वंदन अधिनियम से है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा। हालांकि यह कानून 2023 में पारित हो चुका है, लेकिन इसकी लागू करने की प्रक्रिया परिसीमन से जुड़ी हुई है।
नई व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने की योजना है।
क्यों बना हुआ है विवाद?
परिसीमन को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस समेत कई दलों का कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण करने से दक्षिण भारत के राज्यों की संसद में हिस्सेदारी घट सकती है, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा लाभ मिल सकता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे “खतरनाक” बताया है और कहा है कि यह संघीय ढांचे के लिए नुकसानदेह हो सकता है। विपक्ष का यह भी कहना है कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है।
सरकार का पक्ष
वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि परिसीमन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होगा और इसमें सभी राजनीतिक दलों से चर्चा की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हर राज्य में अलग परिसीमन समिति बनाई जाएगी, जो सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लेगी।
क्या हो सकता है असर?
यदि ये विधेयक पास हो जाते हैं, तो भारत की संसदीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है—लोकसभा की सीटें बढ़ेंगी, महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बदल सकता है। हालांकि परिसीमन को लेकर राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
