नई दिल्ली. महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 (जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ भी कहा जाता है) 16 अप्रैल 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय की अधिसूचना के बाद यह संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम प्रभाव में आया, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
वास्तविक क्रियान्वयन अभी तुरंत संभव नहीं
हालांकि कानून लागू हो गया है, लेकिन इसका वास्तविक क्रियान्वयन अभी तुरंत संभव नहीं है। सरकार के अनुसार, महिला आरक्षण को लागू करने के लिए नए परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया आवश्यक होगी, जो अगली जनगणना (2027 के बाद प्रस्तावित) के आधार पर होगी। इसी वजह से इसे व्यवहारिक रूप से 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की संभावना सीमित मानी जा रही है, जबकि पूर्ण क्रियान्वयन 2034 तक भी खिसक सकता है।
कानून में यह भी प्रावधान है कि प्रत्येक परिसीमन के बाद महिला आरक्षण के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, यानी आरक्षण स्थायी रूप से एक ही सीटों पर नहीं रहेगा बल्कि जनसंख्या और परिसीमन के आधार पर बदलता रहेगा।
तीन संशोधन विधेयक पेश किए हैं
सरकार ने अब लोकसभा में तीन संशोधन विधेयक (amendment bills) पेश किए हैं, जिनका उद्देश्य इस आरक्षण को 2029 के चुनाव चक्र तक लागू करने की प्रक्रिया को तेज करना बताया जा रहा है। लेकिन विपक्ष और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जनगणना और परिसीमन नहीं होता, तब तक इसे लागू करना संवैधानिक रूप से कठिन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इस मुद्दे पर बोलते हुए इसे “ऐतिहासिक अवसर” बताया और कहा कि यह समय भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए निर्णायक हो सकता है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि इस अवसर को राजनीतिक विवाद में न उलझाकर राष्ट्रीय हित में आगे बढ़ाया जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कानून भारत की चुनावी राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह परिसीमन, जनगणना और राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगी।
