नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की नई रिपोर्ट ने भारत में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 39.2 करोड़ बच्चे यानी देश के करीब 92 प्रतिशत बच्चे अत्यधिक गर्मी (Extreme Heat) की परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इनमें से लगभग 8.9 करोड़ बच्चे सीधे तौर पर हीटवेव यानी लू की चपेट में आने के जोखिम का सामना कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती गर्मी और लगातार तीव्र होती हीटवेव बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर गहरा असर डाल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ रहा असर
UNICEF ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अत्यधिक तापमान का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। तेज गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, कुपोषण और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही गर्म मौसम के दौरान स्कूलों में उपस्थिति प्रभावित होती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, छोटे बच्चों और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों के बच्चों पर इसका प्रभाव और अधिक गंभीर होता है, क्योंकि उनके पास पर्याप्त संसाधन और सुरक्षा उपाय उपलब्ध नहीं होते।
हीट एक्शन प्लान में बच्चों की जरूरतों को शामिल करने की सलाह
UNICEF ने कहा कि भारत के कई राज्यों और शहरों में हीट एक्शन प्लान (Heat Action Plans) लागू हैं, लेकिन इनमें बच्चों की विशेष जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। संगठन ने सुझाव दिया है कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को इन योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए।
रिपोर्ट में रात के समय बढ़ती गर्मी को भी योजनाओं में शामिल करने की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही ऐसे जिलों की पहचान करने पर जोर दिया गया है जहां बच्चे सबसे अधिक जलवायु जोखिम का सामना कर रहे हैं, ताकि लक्षित सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकें।
दक्षिण एशिया में सबसे अधिक जोखिम वाले देशों में भारत
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में जलवायु जोखिम के मामले में भारत का स्थान सबसे अधिक प्रभावित देशों में है। इस क्षेत्र में केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश का जलवायु खतरा स्कोर भारत से अधिक है। भारत में सबसे बड़ा खतरा अत्यधिक गर्मी और हीटवेव को माना गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ता शहरीकरण, घटते हरित क्षेत्र और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव इस स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।
दुनिया भर में 110 करोड़ बच्चे जलवायु खतरों की चपेट में
UNICEF की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगभग 110 करोड़ बच्चे कम से कम तीन प्रकार के जलवायु खतरों का एक साथ सामना कर रहे हैं। इनमें अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा, चक्रवात और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं शामिल हैं।
संगठन ने दुनिया के देशों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और बच्चों को केंद्र में रखकर जलवायु नीतियां बनाने की अपील की है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए चेतावनी
UNICEF का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा बड़ा सामाजिक और मानवीय संकट बनता जा रहा है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
