नई दिल्ली: देश में इस साल खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में कम दर्ज किया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर तक देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई 1,086.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा इससे 17.69 लाख हेक्टेयर अधिक था। कुल खरीफ क्षेत्र में आई इस कमी की सबसे बड़ी वजह धान की बुवाई में गिरावट बताई जा रही है।
धान की बुवाई में 16 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की कमी
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 4 सितंबर तक धान की बुवाई 421.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में धान का रकबा 438.19 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल धान की बुवाई में करीब 16.37 लाख हेक्टेयर की कमी आई है।
धान के रकबे में सबसे ज्यादा कमी कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड और महाराष्ट्र में दर्ज की गई है। धान खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों में शामिल है, इसलिए इसके रकबे में आई गिरावट का सीधा असर कुल खरीफ बुवाई क्षेत्र पर पड़ा है।
दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी से मिली कुछ राहत
कुल खरीफ रकबे में आई गिरावट के बीच दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस साल कुल दलहन का रकबा 117.13 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 115.30 लाख हेक्टेयर था। इस तरह दलहन की बुवाई में 1.84 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मंत्रालय के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, राजस्थान और मध्य प्रदेश में दलहन की बुवाई बढ़ी है। इन राज्यों में हुई बढ़ोतरी ने महाराष्ट्र, कर्नाटक और ओडिशा में दलहन के रकबे में आई कमी की काफी हद तक भरपाई की है।
उड़द और अरहर की बुवाई बढ़ी
दलहन की प्रमुख फसलों में उड़द और अरहर के रकबे में बढ़ोतरी हुई है। उड़द की बुवाई का क्षेत्र 2.68 लाख हेक्टेयर बढ़कर 25.15 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं अरहर का रकबा 0.72 लाख हेक्टेयर बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर पहुंच गया।
हालांकि, मूंग की बुवाई में कमी दर्ज की गई है। मूंग का रकबा पिछले साल के मुकाबले 1.04 लाख हेक्टेयर घटकर 33.19 लाख हेक्टेयर रह गया है।
मोटे अनाज और मक्का की बुवाई भी घटी
श्री अन्न और मोटे अनाज के कुल रकबे में भी मामूली कमी आई है। इस साल इन फसलों की बुवाई 181.39 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 182.48 लाख हेक्टेयर थी।
मक्का की बुवाई का क्षेत्र 2.99 लाख हेक्टेयर घटकर 91.09 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। बाजरा का रकबा 1.99 लाख हेक्टेयर बढ़कर 64.86 लाख हेक्टेयर हो गया है।
तिलहन की बुवाई में भी गिरावट
खरीफ सीजन की तिलहन फसलों के रकबे में भी कमी देखने को मिली है। तिलहन का कुल क्षेत्र इस साल 191.99 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 193.06 लाख हेक्टेयर था।
सोयाबीन का रकबा 1.16 लाख हेक्टेयर घटकर 121.82 लाख हेक्टेयर रह गया है। वहीं मूंगफली की बुवाई भी 0.83 लाख हेक्टेयर कम हुई है और इसका क्षेत्र 49.61 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया।
गन्ना और कपास की बुवाई भी कम
गन्ने की बुवाई का रकबा इस साल 58.47 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 0.40 लाख हेक्टेयर कम है। इसी तरह कपास का रकबा भी घटा है। कपास की बुवाई 0.69 लाख हेक्टेयर कम होकर 109.17 लाख हेक्टेयर रह गई।
इन प्रमुख नकदी फसलों के रकबे में कमी भी कुल खरीफ क्षेत्र में आई गिरावट की एक वजह है।
जूट और मेस्ता की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी
कुछ फसलों की बुवाई में बढ़ोतरी भी हुई है। जूट और मेस्ता का कुल रकबा पिछले साल के 6.24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गया है। हालांकि, यह बढ़ोतरी कुल खरीफ रकबे में आई बड़ी कमी की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं रही।
कुल खरीफ रकबा पिछले साल से नीचे
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से साफ है कि इस साल 4 सितंबर तक खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कम है। धान, मक्का, तिलहन, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख फसलों के रकबे में कमी आई है। दूसरी ओर दलहन और कुछ अन्य फसलों की बुवाई बढ़ी है, जिससे कुल गिरावट कुछ हद तक कम हुई।
कुल मिलाकर इस खरीफ सीजन में अब तक बुवाई का रुझान पिछले साल की तुलना में कमजोर रहा है। खासतौर पर धान के रकबे में आई बड़ी गिरावट ने कुल खरीफ कवरेज को प्रभावित किया है।

