नई दिल्ली: पशुओं की निगरानी और उनकी सेहत पर नजर रखने के लिए अब Artificial Intelligence यानी AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। नागालैंड स्थित ICAR-National Research Centre on Mithun के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा AI सिस्टम तैयार किया है, जो खेत के प्राकृतिक माहौल में मिथुन के व्यवहार को रियल टाइम में पहचान और ट्रैक कर सकता है। इस तकनीक की मदद से पशुपालकों को बिना लगातार सामने मौजूद रहे अपने पशुओं के व्यवहार और स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारी मिल सकती है।
‘Cattle of the Hills’ मिथुन पर AI की नजर
मिथुन यानी Bos frontalis को पूर्वोत्तर भारत में ‘Cattle of the Hills’ के नाम से भी जाना जाता है। यह पूर्वोत्तर के आदिवासी समुदायों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पशु है। कई इलाकों में मिथुन लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मिथुन के रोजमर्रा के व्यवहार में होने वाले बदलावों को समझकर उसके स्वास्थ्य, पोषण और शारीरिक स्थिति के बारे में शुरुआती संकेत हासिल किए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से AI आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की गई है।
24 घंटे पशुओं पर रखी जा सकेगी नजर
मिथुन के व्यवहार की निगरानी के लिए नागालैंड स्थित ICAR-NRC on Mithun के फार्म में 12 हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगाए गए। इन कैमरों के जरिए दिन और रात लगातार निगरानी की गई। रात के समय पशुओं को देखने के लिए कैमरों में Infrared सुविधा का भी इस्तेमाल किया गया।
वैज्ञानिकों ने कैमरों से मिले वीडियो फुटेज के आधार पर 3,000 तस्वीरों का एक Dataset तैयार किया। इन तस्वीरों में मिथुन के चार प्रमुख व्यवहारों को चिन्हित किया गया, जिनमें खाना खाना, खड़ा होना, लेटना और Mounting यानी प्रजनन से जुड़ा व्यवहार शामिल है।
AI पहचानता है मिथुन का व्यवहार
इस सिस्टम में YOLOv8n मॉडल का इस्तेमाल मिथुन के व्यवहार की पहचान करने के लिए किया गया है, जबकि DeepSORT तकनीक के जरिए अलग-अलग पशुओं को ट्रैक किया जाता है। इसका मतलब है कि सिस्टम केवल यह नहीं बताता कि कोई मिथुन क्या कर रहा है, बल्कि अलग-अलग पशुओं की पहचान बनाए रखते हुए उनके व्यवहार को लगातार ट्रैक भी कर सकता है।
इस तकनीक से किसी पशु के खाने, खड़े रहने या लेटने के पैटर्न में बदलाव का पता लगाया जा सकता है। ऐसे बदलाव पशु की सेहत, आराम, पोषण या शारीरिक स्थिति में किसी परिवर्तन का संकेत दे सकते हैं।
AI सिस्टम की Accuracy बेहद ज्यादा
शोध के अनुसार, YOLOv8n मॉडल ने mAP@0.5 पर 99.5 प्रतिशत Mean Average Precision हासिल की। वहीं इसका Recall 99.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। सिस्टम ने NVIDIA RTX 3060 GPU पर करीब 31 फ्रेम प्रति सेकंड की गति से काम किया, जिससे इसके Real-Time Monitoring में इस्तेमाल की संभावना दिखाई देती है।
वैज्ञानिकों ने सिस्टम को खेत की कई मुश्किल परिस्थितियों में भी जांचा। इसमें पशुओं का आंशिक रूप से एक-दूसरे के पीछे छिप जाना, आसपास का अव्यवस्थित बैकग्राउंड, गीली और असमान जमीन, परछाइयां, Motion Blur और रात में Infrared फुटेज जैसी स्थितियां शामिल थीं।
पशुओं की बीमारी का पहले पता लगाने में मदद
इस AI तकनीक का सबसे बड़ा फायदा पशुओं की सेहत और देखभाल में हो सकता है। अगर किसी मिथुन के खाने, खड़े होने या लेटने के व्यवहार में सामान्य स्थिति से बदलाव आता है तो लगातार निगरानी के जरिए इसकी जानकारी हासिल की जा सकती है। इससे पशुपालकों को संभावित स्वास्थ्य समस्या के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं।
वहीं Mounting Behaviour की निगरानी से प्रजनन और Oestrus Management में भी मदद मिल सकती है। इस तरह AI सिस्टम पशुपालकों और Livestock Managers को दिन-रात लगातार पशुओं की निगरानी करने की जरूरत को कम कर सकता है।
अभी चार तरह के व्यवहार पर फोकस
फिलहाल इस तकनीक को चार प्रमुख व्यवहारों की पहचान के लिए तैयार किया गया है। वैज्ञानिक भविष्य में इसमें और अधिक व्यवहार जोड़ने की योजना पर काम कर रहे हैं। इनमें पशुओं के बीच आक्रामकता, Grooming और बीमारी के दौरान होने वाली असामान्य निष्क्रियता जैसे व्यवहार शामिल हो सकते हैं।
भविष्य में AI सिस्टम को ऐसे मॉडल के साथ भी जोड़ा जा सकता है जो समय के साथ पशुओं के व्यवहार में होने वाले बदलावों का विश्लेषण कर सकें। इसके अलावा छोटे और कम ऊर्जा वाले Edge Devices पर इस तकनीक को चलाने और अलग-अलग मौसम व फार्म से जुड़े बड़े Dataset तैयार करने पर भी काम किया जा सकता है।
अलग-अलग जगहों पर परीक्षण की जरूरत
शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सिस्टम अभी केवल एक फार्म पर जांचा गया है। इसलिए इसे अलग-अलग फार्म, भौगोलिक क्षेत्रों, मौसम, पशुओं की संख्या और कैमरों की अलग-अलग व्यवस्था में आगे भी टेस्ट करना जरूरी है।
कुछ परिस्थितियों में जब पशु पूरी तरह से एक-दूसरे के पीछे छिप जाते हैं तो Detection और Tracking की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, Individual Identity Tracking की क्षमता का मानक तरीकों से और विस्तृत मूल्यांकन भी आगे किया जाना बाकी है।
पशुपालन में AI का बढ़ता इस्तेमाल
यह शोध Livestock Management में Artificial Intelligence और Computer Vision के बढ़ते इस्तेमाल की संभावनाओं को दिखाता है। लगातार और Data-Driven Monitoring के जरिए पशुओं के स्वास्थ्य, व्यवहार और प्रजनन से जुड़ी जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है।
शोध Engineering Research Express, Volume 8 (2026), Article 175213 में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में ICAR-NRC on Mithun, नागालैंड के शोधकर्ताओं के साथ NIT Nagaland, Nagaland University और CHRIST (Deemed to be University) के शोधकर्ताओं ने भी सहयोग किया है। यह तकनीक आगे चलकर Precision Livestock Farming को बढ़ावा देने और पशुपालकों को बेहतर तरीके से अपने पशुओं की निगरानी करने में मदद कर सकती है।

