नई दिल्ली. नई दिल्ली में आयोजित BRICS Chief Justices’ Forum के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने BRICS सदस्य देशों और Partner Countries से आए न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए स्वस्थ असहमति, विचार-विमर्श और संवाद की संस्कृति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी मजबूत न्यायिक व्यवस्था में अलग-अलग विचारों पर खुले तौर पर चर्चा और सार्थक संवाद की गुंजाइश होनी चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत ने इस दौरान समय पर और भरोसेमंद तरीके से न्याय उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों और संस्थानों के लिए Justice Delivery System ऐसा होना चाहिए, जिसमें न्याय मिलने की प्रक्रिया समयबद्ध और पूर्वानुमानित हो। इससे न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत होता है और अलग-अलग देशों के बीच कानूनी सहयोग को भी बढ़ावा मिलता है।
नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देकर BRICS की भूमिका समझाई
CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में भारत के प्राचीन Nalanda University का उदाहरण भी दिया। उन्होंने याद दिलाया कि नालंदा कभी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्रों में शामिल था, जहां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी और शोधकर्ता बिना किसी भेदभाव और बाधा के शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे।
उन्होंने कहा कि BRICS को भी एक ऐसे जीवंत मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां अलग-अलग देशों के लोग अपने अनुभव, विचार और ज्ञान साझा कर सकें। इसी संदर्भ में उन्होंने BRICS को एक Living Nalanda University के रूप में देखने की बात कही। उनका मानना है कि न्यायिक सहयोग और संवाद के जरिए BRICS देशों के बीच आपसी समझ को और मजबूत किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम में Brazil के Supreme Federal Court के President Luiz Edson Fachin और China के Chief Justice Zhang Jun समेत अन्य वरिष्ठ न्यायिक प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कारोबार के बीच Mediation जरूरी
BRICS Forum के दौरान Mediation पर आयोजित विशेष सत्र में जस्टिस सूर्यकांत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विवाद समाधान के बीच संबंध पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देशों के बीच व्यापार और कारोबारी गतिविधियां बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे अलग-अलग देशों की कंपनियों के बीच विवाद भी सामने आ सकते हैं। ऐसे मामलों में प्रभावी, विश्वसनीय और व्यावहारिक Dispute Resolution Mechanism की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों की कानूनी और कारोबारी व्यवस्थाएं एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं। ऐसे में विवादों को सुलझाने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो विभिन्न Legal and Commercial Cultures के बीच प्रभावी ढंग से काम कर सके। उन्होंने BRICS देशों के बीच Mediation Institutions के सहयोग को मजबूत करने की जरूरत बताई।
न्यायाधीशों, वकीलों और व्यवसायों के बीच संवाद पर जोर
सीजेआई ने कहा कि केवल सॉफ्टवेयर स्तरों पर समर्थन समर्थन नहीं है, बल्कि न्यायाधीशों, मध्यस्थों, वकीलों और व्यवसायों के बीच भी नियमित संवाद होना चाहिए। इसके साथ ही प्रोफेशनल ट्रेनिंग और बहुभाषी क्षमता को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि अलग-अलग देशों और व्यवसायों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
उन्होंने कहा कि Mediation को मजबूत बनाने से विवादों को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय बातचीत और आपसी सहमति के माध्यम से सुलझाने में मदद मिल सकती है। इससे कारोबारी गतिविधियों में अनावश्यक रुकावट कम होगी और देशों तथा कारोबारी संस्थानों के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
भारत में Mediation को दिया जा रहा बढ़ावा
जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में Mediation को अपनी Justice Delivery System का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। उन्होंने देशभर में चलाए गए “Mediation for the Nation” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल के कारण मध्यस्थता को आम लोगों और संस्थागत स्तर पर अधिक महत्व मिला है।
उन्होंने कहा कि भारत में Mediation को लेकर किए गए प्रयासों के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। उनके अनुसार, मध्यस्थता को और मजबूत किए जाने की जरूरत है, ताकि विवादों का समाधान बातचीत के जरिए हो सके, व्यापारिक गतिविधियां जारी रह सकें और BRICS सदस्य देशों तथा Partner Countries के बीच आपसी विश्वास बढ़े।
AI से लेकर सतत विकास तक हुई चर्चा
BRICS Chief Justices’ Forum में न्याय व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण और उभरते हुए मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें Mediation and International Commercial Disputes, Cross-Border Enforcement of Arbitral Awards, Artificial Intelligence and the Judiciary और Judicial Leadership and Sustainable Development जैसे विषय शामिल रहे।
इन चर्चाओं में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों के समाधान, अलग-अलग देशों में मध्यस्थता या Arbitration से जुड़े फैसलों को लागू करने, न्यायपालिका में Artificial Intelligence के इस्तेमाल और सतत विकास के लिए न्यायिक नेतृत्व की भूमिका जैसे मुद्दों पर विचार साझा किए गए।
BRICS देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
BRICS Chief Justices’ Forum का उद्देश्य सदस्य देशों और Partner Countries की न्यायपालिकाओं के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करना भी है। फोरम के माध्यम से विभिन्न देशों के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने और बदलते कानूनी एवं संस्थागत मुद्दों पर एक-दूसरे के विचार समझने का अवसर मिला।
CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में जिस तरह Mediation, संवाद, न्याय की समयबद्ध व्यवस्था और आपसी सहयोग पर जोर दिया, उससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में BRICS देशों के बीच Judicial Cooperation को और मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। इस तरह का सहयोग न केवल कानूनी मामलों में आपसी समझ बढ़ाने में मदद कर सकता है, बल्कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बदलती तकनीक के दौर में न्याय व्यवस्था को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

