नई दिल्ली. राजस्थान में आगामी Urban Local Body Elections को लेकर सोमवार, 17 अगस्त 2026 को 309 शहरी निकायों के 10,245 वार्डों के लिए आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी की गई। इस Reservation Lottery के बाद कई मौजूदा पार्षदों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं, जबकि नए उम्मीदवारों के लिए भी चुनावी मैदान में उतरने के रास्ते खुल गए हैं। राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच इस प्रक्रिया को बेहद अहम माना जा रहा है। राजस्थान सरकार ने 309 शहरी निकायों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाई है।
309 निकायों में 10 हजार से ज्यादा वार्ड
राजस्थान के शहरी निकाय ढांचे में कुल 309 निकाय शामिल हैं। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं। इन सभी निकायों के कुल 10,245 वार्डों में आरक्षण का निर्धारण किया गया है। Rajasthan Municipalities Act के तहत वार्डों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण निर्धारित करने का प्रावधान है। आरक्षित सीटों का आवंटन अलग-अलग वार्डों में रोटेशन के आधार पर किया जा सकता है।
महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण
आरक्षण व्यवस्था में महिलाओं को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व दिया गया है। राज्यभर में कुल 3,356 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसका असर आगामी Civic Elections में बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के रूप में देखने को मिल सकता है। आरक्षण की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी रणनीति पर नए सिरे से काम शुरू कर दिया है।
जयपुर में 150 वार्डों का भी बदला समीकरण
जयपुर के 150 Municipal Corporation Wards के लिए भी आरक्षण की तस्वीर साफ हो गई है। यहां अनुसूचित जाति के लिए 20 वार्ड निर्धारित किए गए हैं, जिनमें 13 वार्ड सामान्य रूप से और 7 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए 6 वार्ड हैं, जिनमें 4 सामान्य और 2 महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
वहीं Other Backward Classes यानी OBC के लिए 30 वार्ड आरक्षित हैं। इनमें 20 सामान्य और 10 महिला आरक्षित वार्ड शामिल हैं। इसके अलावा 94 वार्ड Unreserved यानी सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं, जिनमें 63 सामान्य और 31 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
पुराने पार्षदों की रणनीति पर पड़ा असर
Ward Reservation Lottery के बाद उन पूर्व पार्षदों और संभावित उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति बदलनी पड़ सकती है, जिनके वार्ड की आरक्षण श्रेणी बदल गई है। कई नेताओं को अब अपने लिए दूसरे वार्ड या नई राजनीतिक भूमिका तलाशनी होगी। वहीं जिन वार्डों को उनकी पसंदीदा श्रेणी में रखा गया है, वहां संभावित उम्मीदवार चुनाव की तैयारियों में तेजी ला सकते हैं।
आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद राजनीतिक दलों के सामने भी Candidate Selection की चुनौती बढ़ गई है। खासतौर पर महिला, SC, ST और OBC आरक्षित वार्डों में उपयुक्त उम्मीदवारों को मैदान में उतारना पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
चुनावी कार्यक्रम पर अब सबकी नजर
आरक्षण लॉटरी के बाद अब स्थानीय निकाय चुनाव की अगली प्रक्रिया पर नजर है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार 22 अगस्त को चुनाव संबंधी अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। मतदान दो चरणों में 5 सितंबर और 9 सितंबर को कराया जाना है, जबकि मतगणना और परिणाम 11 सितंबर 2026 को घोषित किए जाने का कार्यक्रम बताया गया है।
इस बीच राज्य सरकार ने Panchayati Raj संस्थाओं के वार्डों की आरक्षण लॉटरी को अलग से आगे बढ़ाया है। इसके लिए पहले 17 और 18 अगस्त की तारीख तय थी, लेकिन अब इसे 17 और 18 सितंबर तक स्थगित किया गया है। हालांकि 309 Urban Local Bodies के वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रही।
आरक्षण के बाद तेज होगी चुनावी हलचल
वार्डों की आरक्षण स्थिति स्पष्ट होने के बाद राजस्थान में स्थानीय चुनावों की राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। मौजूदा पार्षदों से लेकर नए दावेदारों तक सभी अब अपने-अपने क्षेत्र के समीकरणों का आकलन करेंगे। जयपुर समेत राज्य के सभी प्रमुख शहरों में Reservation Lottery के बाद उम्मीदवारों की दावेदारी और राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
