नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश में अचानक फैली पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों के कारण कई जिलों में हालात बिगड़ गए। राज्य में 400 से अधिक पेट्रोल पंपों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जबकि सरकार का कहना है कि वास्तविक रूप से किसी तरह की ईंधन की कमी नहीं है।
कई जिलों में लंबी कतारें और हंगामा
राज्य के कई शहरों में स्थिति तनावपूर्ण रही:
विजयवाड़ा
गुंटूर
राजामहेंद्रवरम
कुरनूल
नेल्लोर
कई जगह पेट्रोल पंपों पर:
घंटों लंबी कतारें
लोगों के बीच बहस और झड़प
ईंधन खत्म होने के बोर्ड लगाए गए
कितने पंप प्रभावित हुए?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
राज्य में कुल पेट्रोल पंप: 4,510
प्रभावित/स्टॉक खत्म पंप: 421
कई पंपों ने बिक्री सीमित कर दी:
बाइक: केवल 2 लीटर
कार: केवल 10 लीटर
अचानक बढ़ी मांग
Andhra Pradesh Petrol Dealers Association के अनुसार:
सामान्य डीजल बिक्री: लगभग 7,000 लीटर प्रतिदिन
अचानक बढ़कर: 14,000 लीटर से अधिक
यह वृद्धि किसी वास्तविक कमी के बजाय पैनिक बाइंग (panic buying) के कारण हुई।
अफवाहों से शुरू हुआ संकट
जानकारी के मुताबिक:
सोशल मीडिया पर ईंधन संकट की अफवाहें वायरल हुईं
ईरान–अमेरिका तनाव को लेकर वैश्विक तेल संकट की आशंका फैलाई गई
लोगों ने जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवाना शुरू कर दिया
इससे पंपों पर अचानक भारी भीड़ जमा हो गई।
सरकार का बयान
मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि राज्य में ईंधन की वास्तविक कमी नहीं है।
अधिकतर पंप स्टॉक खत्म होने से नहीं, बल्कि भीड़ नियंत्रित करने के लिए बंद किए गए
सप्लाई सामान्य रूप से जारी है
आपूर्ति की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक दिन में सप्लाई:
पेट्रोल: 10,345 किलोलीटर
डीजल: 14,156 किलोलीटर
इसके बावजूद अचानक मांग बढ़ने से अस्थायी दबाव बना।
मुख्यमंत्री का एक्शन
एन. चंद्रबाबू नायडू ने:
वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की
जिला कलेक्टरों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए
स्थिति पर रिपोर्ट तलब की
भीड़ और अफवाहों को नियंत्रित करने के आदेश दिए
वैश्विक कारण और डर
रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान–अमेरिका तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी,स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को लेकर अनिश्चितता बनी। भारत अपनी 85% ऊर्जा आयात करता है, इसलिए वैश्विक घटनाओं का असर जल्दी महसूस होता है।
हालांकि केंद्र सरकार ने कहा है किदेश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह स्थिर है वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाया जा रहा है.
आंध्र प्रदेश में बना यह संकट वास्तविक कमी नहीं बल्कि अफवाहों और पैनिक बाइंग का परिणाम है। सरकार और प्रशासन स्थिति को सामान्य करने और अफवाहों पर नियंत्रण के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
