नई दिल्ली: Supreme Court of India ने NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द होने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि 2024 में दिए गए निर्देशों और सुधार संबंधी सिफारिशों के बावजूद National Testing Agency (NTA) ने कोई सबक नहीं सीखा।
जस्टिस PS Narasimha और जस्टिस Alok Aradhe की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए NTA को नोटिस जारी किया और पूछा कि हाई पावर्ड कमेटी की सिफारिशों पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने NTA से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।
‘हम बेहद दुखी हैं, NTA ने सबक नहीं सीखा’
सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “हम बेहद दुखी हैं। NTA ने कोई सबक नहीं सीखा। हमने पहले समिति बनाने का निर्देश दिया था और उसकी सिफारिशें स्वीकार भी की गई थीं।”
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं की प्रतियां सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta को उपलब्ध कराई जाएं।
2024 में भी सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई निर्देश
गौरतलब है कि 2024 में NEET-UG पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार किया था, लेकिन परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई अहम निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने डॉ. राधाकृष्णन समिति के दायरे का विस्तार करते हुए परीक्षा सुरक्षा, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, CCTV निगरानी, उम्मीदवार सत्यापन, एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल, तकनीकी सुरक्षा और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार सुझाने को कहा था।
NTA को भंग करने की मांग
इस बार दायर याचिकाओं में NTA को भंग करने या उसके ढांचे में बड़े बदलाव की मांग की गई है। United Doctors Front (UDF) ने अपनी याचिका में NTA को “सिस्टमेटिक फेलियर” बताते हुए संसद के जरिए एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण बनाने की मांग की है।
वहीं Federation of All India Medical Association (FAIMA) ने कोर्ट की निगरानी में दोबारा NEET-UG 2026 परीक्षा कराने की मांग की है।
23 लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य प्रभावित
याचिकाओं में कहा गया है कि NEET परीक्षा में बार-बार पेपर लीक होने से 22 से 23 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इससे छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया कि Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू होने के बावजूद सरकार संगठित नकल गिरोहों और पेपर लीक को रोकने में विफल रही है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा मॉडल पर जोर
याचिकाकर्ताओं ने डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में निजी एजेंसियों पर निर्भरता कम की जाए और कंप्यूटर आधारित या हाइब्रिड परीक्षा मॉडल लागू किया जाए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए NTA से जवाब तलब किया है।
