नई दिल्ली. लोकसभा ने सोमवार को न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी और इसे बिना चर्चा के मंजूरी दे दी गई। सदन में शोर-शराबा जारी रहने के बाद पीठासीन अधिकारी ने कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
न्यायाधिकरणों की व्यवस्था में सुधार का लक्ष्य
दोपहर दो बजे दूसरी बार स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हंगामे के बीच विधेयक पेश किया। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों के कामकाज को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। इसके साथ ही अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति तथा सेवा शर्तों में एकरूपता लाने का भी प्रस्ताव है।
राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग बनाने का प्रस्ताव
विधेयक में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। इस आयोग की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा किए जाने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि इससे न्यायाधिकरणों की नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशासन और कामकाज में स्वतंत्रता तथा पारदर्शिता को मजबूत किया जा सकेगा।
अदालतों के विकल्प नहीं होंगे न्यायाधिकरण
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्यायाधिकरण अदालतों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि आधुनिक शासन व्यवस्था में उनके सहयोगी संस्थान के रूप में काम करते हैं। कर, कंपनी कानून, पर्यावरण, प्रतिभूति बाजार और बौद्धिक संपदा जैसे विशेष मामलों में न्यायाधिकरणों के जरिए तेजी से न्याय उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।
2015 से शुरू हुई थी न्यायाधिकरणों के पुनर्गठन की प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने 2015 में न्यायाधिकरणों के पुनर्गठन और तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब नए विधेयक के माध्यम से एक आधुनिक, स्वतंत्र और एक समान न्यायाधिकरण व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। सरकार का जोर बेहतर प्रशासन, पारदर्शी नियुक्तियों और तेजी से मामलों के निपटारे पर है।
हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने विपक्ष से की अपील
विपक्षी सांसदों के विरोध के बीच पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद चर्चा और संवाद के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष की ओर से लगातार कार्यवाही बाधित की जा रही है।
अमित शाह के बयान का मुद्दा भी उठा
जगदंबिका पाल ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही विपक्ष की मांग को स्वीकार कर चुके हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर सदन में बयान देने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद सदन में लगातार हंगामा होने पर उन्होंने सदस्यों से कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की।

