नई दिल्ली. अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त दान की रकम में कथित हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं। SIT ने इस मामले में करीब 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि दान की रकम में हेराफेरी बैंक तक पहुंचाने के दौरान नहीं, बल्कि कैश की गिनती के समय की गई। जांच के मुताबिक, रकम हटाने, उसे छिपाने और बाद में आपस में बांटने के लिए कथित तौर पर कई लोगों का नेटवर्क काम कर रहा था। जांच दस्तावेज में CCTV फुटेज के आधार पर कैश काउंटिंग क्षेत्र से रकम हटाने या छिपाने के 105 मामलों का जिक्र किया गया है। इसके अलावा जांच एजेंसी ने आरोपियों के मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में संदेश, नकदी और अन्य कीमती सामान भी बरामद किए हैं।
आठ आरोपियों के नाम चार्जशीट में शामिल
SIT की चार्जशीट में आठ आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। सभी आठ आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में बताए गए हैं। जांच एजेंसी ने मामले में पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव को अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में शामिल किया है।
105 मामलों में CCTV फुटेज से जांच आगे बढ़ी
चार्जशीट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने कैश काउंटिंग सेंटर की CCTV फुटेज को बारीकी से खंगाला। इसी फुटेज के आधार पर कथित तौर पर नकदी को बिना अनुमति हटाने या छिपाने के 105 मामले चिह्नित किए गए। SIT ने इन CCTV रिकॉर्डिंग को डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयानों, बैंकिंग रिकॉर्ड और फॉरेंसिक ऑडिट से मिलाकर जांच की। जांच एजेंसी के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गिनी गई रकम को बाद में बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया के दौरान दान की रकम की हेराफेरी का कोई सबूत नहीं मिला है। SIT ने अपनी जांच में कथित गड़बड़ी का मुख्य स्थान कैश काउंटिंग प्रक्रिया को बताया है।
बैंक खातों और संपत्तियों तक पहुंची जांच
SIT ने कथित हेराफेरी की रकम के संभावित मनी ट्रेल को भी खंगाला। इसके लिए आरोपियों और उनके रिश्तेदारों से जुड़े बैंक खातों, संपत्तियों, वाहनों और अन्य परिसंपत्तियों की जांच की गई। पुलिस के मुताबिक, आठ आरोपियों में से सात से कथित हेराफेरी से जुड़ी करीब 79.85 लाख रुपये की रकम बरामद की गई है। हालांकि, सुभाष श्रीवास्तव से इस तरह की कोई बरामदगी नहीं होने की बात चार्जशीट में कही गई है। जांच एजेंसी ने बरामद रकम और अन्य संपत्तियों को मामले में कथित धन के इस्तेमाल से जोड़कर जांच की है।
अनुकल्प मिश्रा को बताया गया कथित मुख्य साजिशकर्ता
पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा को मामले का कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया है। चार्जशीट के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा की अपने रिश्तेदार लवकुश मिश्रा और आरोपी अविनाश शुक्ला के साथ लगातार बातचीत होती थी। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों के मोबाइल फोन से 3,000 से अधिक डिलीट किए गए मैसेज बरामद किए गए हैं। इन संदेशों में कथित तौर पर रकम को हटाने, छिपाने, एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और बाद में बांटने से जुड़ी बातचीत होने का दावा किया गया है। SIT ने इन संदेशों को कथित साजिश से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के तौर पर चार्जशीट में शामिल किया है।
CCTV में अलग-अलग आरोपियों की कथित भूमिका का जिक्र
जांच रिपोर्ट में CCTV फुटेज के आधार पर अलग-अलग आरोपियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। चार्जशीट के अनुसार, अविनाश शुक्ला कथित तौर पर 85 मौकों पर दान की रकम हटाने में शामिल था। वहीं अनुकल्प मिश्रा की कथित मदद 56 मौकों, करुणेश पांडे की 68 मौकों और लवकुश मिश्रा की 52 मौकों पर सामने आने का दावा किया गया है। SIT ने इन घटनाओं को CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखा है। ये सभी दावे जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप हैं और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही सामने आएगा।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ था मामला
राम मंदिर में दान की रकम के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला 25 जून को दर्ज किया गया था। यह मामला ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ, जिसमें दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। इसके बाद प्रारंभिक जांच और आगे की कार्रवाई के दौरान SIT ने CCTV फुटेज, डिजिटल डाटा, बैंक रिकॉर्ड, फॉरेंसिक ऑडिट और आरोपियों से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच की।
SIT की विस्तृत चार्जशीट में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि दान की रकम की कथित हेराफेरी कैश काउंटिंग के दौरान हुई और इसके बाद रकम को छिपाने तथा बांटने की कोशिश की गई। अब इस मामले में अदालत चार्जशीट और जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।

