नई दिल्ली. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश में खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और अन्य कृषि गतिविधियों को जोड़ने से किसानों की आय बढ़ेगी और खेती पर आने वाले जोखिम भी कम होंगे।
किसानों की जरूरत के अनुसार हो कृषि अनुसंधान
नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों और वैज्ञानिकों की साझा मेहनत से देश में कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आईसीएआर देश में कृषि परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मांग आधारित अनुसंधान करने की अपील की, ताकि शोध का लाभ किसानों को समय पर मिल सके।
देश ने बनाया खाद्यान्न उत्पादन का नया रिकॉर्ड
कृषि मंत्री ने बताया कि भारत ने इस वर्ष 37.6 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि किसानों की मेहनत और वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर उपयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।
386 नई फसल किस्में और 117 बागवानी किस्में विकसित
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान 44 फसलों की 386 नई किस्में और बागवानी फसलों की 117 नई किस्में विकसित की गई हैं। उन्होंने कहा कि नई किस्मों से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बदलते मौसम और जलवायु की चुनौतियों का सामना करने में भी किसानों को मदद मिलेगी।
तकनीक से किसानों की समृद्धि का रास्ता होगा आसान
कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि आईसीएआर की “लैब टू लैंड” तकनीक और वैज्ञानिक नवाचार किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की समृद्धि, देश की खाद्य सुरक्षा और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी।
