नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में भारतीय प्रवासियों, भारत की विविधता और हिंदू-मुस्लिम संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। Madison Square Garden में आयोजित Universal Oneness Celebration को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अपने वर्तमान देश के प्रति जिम्मेदार और वफादार रहना चाहिए, जबकि अपनी जन्मभूमि से मिले मूल्यों को भी साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासियों की पहली जिम्मेदारी उस देश के प्रति है, जहां वे रह रहे हैं और अपना जीवन बना रहे हैं।
जिस देश में रहते हैं, उसके प्रति निभाएं जिम्मेदारी
मोहन भागवत ने Bharatiya Diaspora को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अमेरिका में रहता है, यहीं काम करता है और कमाता है तो वह अमेरिकी समाज का हिस्सा है। ऐसे लोगों को अपनी Karma Bhumi यानी जिस देश में वे रह रहे हैं, उसके प्रति पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों को पहले अपने वर्तमान देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी चाहिए। इसके बाद यदि उनके मन में अपनी Janma Bhumi यानी भारत के लिए कुछ करने की इच्छा हो तो वे योगदान दे सकते हैं। भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के लिए योगदान देना कोई अनिवार्यता नहीं है।
भारत की पहचान ‘Unity in Diversity’ से
RSS प्रमुख ने भारत की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि Unity in Diversity भारत के DNA में है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की पहचान अक्सर Pluralism से जोड़ी जाती है, जबकि भारत के संदर्भ में Unity in Diversity की बात होती है। उनके मुताबिक भारत की विशेषता यह है कि यहां अलग-अलग तरह की विविधताओं के बावजूद एकता की भावना कायम रही है।
उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए कि विविधता और एकता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ रह सकते हैं। उन्होंने Swami Vivekananda का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसी राष्ट्र की पहचान केवल उसके भौगोलिक क्षेत्र से नहीं होती, बल्कि उसके सामने एक बड़ा उद्देश्य और अपनी जिम्मेदारी भी होती है।
मुसलमानों को लेकर भी दिया बड़ा बयान
न्यूयॉर्क में आयोजित One World: One Humanity Faith Leaders’ Summit में मोहन भागवत ने Muslims को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि Hindutva की भावना किसी समुदाय को बाहर करने की बात नहीं करती।
भागवत ने बताया कि कुछ मुस्लिम भाइयों ने उनसे सवाल किया था कि RSS एक Hindu Organisation है और वह Hindu Rashtra की बात करता है, ऐसे में मुसलमानों के लिए क्या स्थान है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि किसी को भारत से बाहर निकालना हिंदुत्व की सोच नहीं है।
‘भारत ने हमेशा सबको शरण दी’
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत की परंपरा हर जरूरतमंद और असुरक्षित व्यक्ति को आश्रय देने की रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जिन लोगों को कहीं सुरक्षित जगह नहीं मिली, भारत ने उन्हें शरण देने का काम किया है। उनके मुताबिक, इसी भावना को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि RSS का मानना है कि पूरी मानवता एक है और संगठन का उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाकर यह संदेश देना है कि विविधताओं के बावजूद इंसान एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
‘मैं और मेरा’ नहीं, ‘हम और हमारा’ जरूरी
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सामूहिकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब सोच केवल ‘मैं’ और ‘मेरा’ तक सीमित रहती है तो समस्याओं का समाधान मुश्किल हो जाता है। इसके बजाय ‘हम’ और ‘हमारा’ की भावना समाज को जोड़ने का काम करती है।
RSS प्रमुख इस समय संगठन के Centenary Year Global Outreach Programme के तहत अमेरिका के दौरे पर हैं। न्यूयॉर्क में उनके अलग-अलग कार्यक्रमों में भारत की संस्कृति, वैश्विक एकता, विविधता और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।