नई दिल्ली. भारत में मानसून की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। 21 सितंबर तक देश में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत से 15 फीसदी कम दर्ज की गई है। वहीं, अल नीनो की स्थिति मजबूत होने से आने वाले दिनों में बारिश पर असर पड़ने का जोखिम बढ़ गया है। ICICI Bank Research की ताजा कृषि रिपोर्ट में इसे कृषि क्षेत्र के लिए प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और जुलाई में हुई सामान्य से अधिक बारिश ने कमजोर मानसून के असर को कुछ हद तक कम किया है।
21 सितंबर तक 15 फीसदी कम हुई बारिश
रिपोर्ट के अनुसार, 21 सितंबर तक देश में कुल 704 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो लंबी अवधि के औसत से 15 फीसदी कम है। बारिश की कमी सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं रही। दक्षिण भारत में स्थिति सबसे ज्यादा कमजोर रही, जहां बारिश 27 फीसदी कम दर्ज की गई। इसके बाद पूर्वी भारत में 26 फीसदी की कमी रही। मध्य भारत में बारिश सामान्य से 6 फीसदी और उत्तर-पश्चिम भारत में 10 फीसदी कम रही।
बारिश के इस असमान वितरण का असर आने वाले समय में कृषि गतिविधियों और जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा, जहां मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
मजबूत हो रहा अल नीनो, खेती के लिए बढ़ा जोखिम
ICICI Bank Research ने अपनी रिपोर्ट में मजबूत होते अल नीनो को कृषि क्षेत्र के लिए एक प्रमुख जोखिम बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, Nino 3.4 इंडेक्स बढ़कर 2.53 पर पहुंच गया है, जबकि 2015 में इसी अवधि के दौरान यह 2.14 था। अल नीनो की स्थिति मजबूत होने से भारत में मानसूनी बारिश प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है।
हालांकि, भारतीय मौसम और कृषि पर अल नीनो का असर कई अन्य मौसमी परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडियन ओशन डायपोल यानी IOD इंडेक्स भी सकारात्मक क्षेत्र में पहुंच गया है और 0.7 पर दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक सकारात्मक IOD आने वाले दिनों में अल नीनो के कुछ नकारात्मक प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकता है।
खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी
कम बारिश के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई पर इसका असर फिलहाल पूरी तरह नहीं दिखा है। 18 सितंबर तक खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 110.4 मिलियन हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 111.9 मिलियन हेक्टेयर से करीब 1.3 फीसदी कम है। हालांकि, यह सामान्य क्षेत्र के लगभग 100 फीसदी तक पहुंच चुका है।
देश की प्रमुख खरीफ फसल धान की बुवाई में जरूर कमी दर्ज की गई है। धान का रकबा 3.7 फीसदी घटकर 42.9 मिलियन हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर, दालों और मोटे अनाज की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में हुई अतिरिक्त बारिश ने भी खरीफ फसलों को कुछ राहत दी, जिससे सामान्य से कम मानसून का प्रभाव आंशिक रूप से कम हुआ।
जलाशयों में पानी की स्थिति पर भी नजर
कृषि क्षेत्र के लिए बारिश के साथ जलाशयों में पानी की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। 17 सितंबर तक देश के जलाशयों में कुल क्षमता का करीब 71 फीसदी पानी उपलब्ध था। हालांकि, यह पिछले साल के स्तर का लगभग 79.4 फीसदी ही है।
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में जलाशयों में पानी का स्तर बेहतर होने से सामान्य से कम बारिश की स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है। इसके विपरीत दक्षिण भारत में जलाशयों की स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां कुल क्षमता का केवल करीब 52 फीसदी पानी उपलब्ध है।
मानसून की वापसी के बीच आगे क्या रहेगा अहम
उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का वितरण और अल नीनो की स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। खरीफ बुवाई लगभग पूरी होने के कारण शुरुआती नुकसान को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन फसलों के विकास, जल उपलब्धता और आगामी कृषि गतिविधियों पर कमजोर बारिश का असर क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग दिखाई दे सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून की शेष बारिश, अल नीनो की मजबूती, सकारात्मक IOD और जलाशयों में उपलब्ध पानी का स्तर कृषि क्षेत्र की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
