नई दिल्ली. देश में बदलते Monsoon Pattern और लगातार बढ़ती Diesel Price ने किसानों की चिंता को और गहरा कर दिया है। एक तरफ मौसम विभाग ने इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है, वहीं दूसरी ओर महंगे ईंधन ने खेती की लागत बढ़ा दी है। ऐसे हालात में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर खेती को नुकसान से कैसे बचाया जाए।
भारत सरकार के नए Monsoon Forecast के मुताबिक इस बार जून से सितंबर के बीच औसत से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका बड़ा कारण El Nino Effect है, जिसकी वजह से भारत में अक्सर कमजोर मॉनसून देखने को मिलता है।
क्यों महत्वपूर्ण है मॉनसून?
भारत की खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर करती है। खेतों की सिंचाई, जलाशयों का स्तर और Groundwater Recharge का बड़ा हिस्सा मॉनसूनी बारिश से ही पूरा होता है। देश की लगभग 70 प्रतिशत पानी की जरूरत Monsoon Rainfall से पूरी होती है। ऐसे में यदि बारिश कम होती है तो इसका सीधा असर Agriculture Production, Food Supply और Economy पर पड़ता है।
IMD का नया अनुमान क्या कहता है?
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार इस साल मॉनसूनी बारिश Long Period Average (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है। इससे पहले अप्रैल में यह अनुमान 92 प्रतिशत बताया गया था, लेकिन अब इसे घटा दिया गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जब बारिश 96% से 104% के बीच होती है तो उसे Normal Rainfall माना जाता है। इस बार अनुमान इससे नीचे है, इसलिए इसे Below Normal Monsoon माना जा रहा है।
कम बारिश का किसानों पर क्या असर होगा?
कम बारिश का सबसे बड़ा असर खेती की सिंचाई पर पड़ता है। जिन इलाकों में नहर या पर्याप्त जल स्रोत नहीं हैं, वहां किसानों को Diesel Pump का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ेगा। इससे खेती की लागत तेजी से बढ़ेगी।
इसके अलावा धान, गन्ना और कपास जैसी Water Intensive Crops को भारी नुकसान हो सकता है। समय पर बारिश नहीं होने से बुवाई में देरी, उत्पादन में कमी और फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
महंगे डीजल ने बढ़ाई परेशानी
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और Crude Oil Price में उछाल का असर अब भारतीय किसानों पर भी दिखने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और खेती से जुड़े अन्य उपकरण चलाना महंगा हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश कम हुई तो किसानों की Diesel Dependency और बढ़ जाएगी, जिससे खेती का खर्च और ज्यादा बढ़ सकता है।
अब क्या करें किसान?
इस चुनौतीपूर्ण समय में किसानों को Traditional Farming के साथ-साथ Modern Agriculture Techniques अपनाने की जरूरत है। कुछ प्रभावी उपाय इस प्रकार हैं:
कम पानी वाली फसलों पर जोर
धान और गन्ने जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों की जगह Millets, Maize, Pulses और Oilseeds जैसी कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इनकी Market Demand भी लगातार बढ़ रही है।
Drip Irrigation और Sprinkler Technology अपनाएं
Micro Irrigation Techniques जैसे Drip Irrigation और Sprinkler System पानी की बड़ी बचत करते हैं। इससे 50 से 70 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है और बिजली या डीजल का खर्च भी कम होता है।
Solar Pump का इस्तेमाल करें
सरकार की PM-KUSUM Scheme के तहत किसानों को Solar Pump लगाने पर Subsidy दी जा रही है। डीजल पंप की जगह सोलर पंप इस्तेमाल करने से सिंचाई की लागत काफी कम हो सकती है।
सूखा सहन करने वाली बीज किस्में चुनें
कृषि विश्वविद्यालयों और Research Centers द्वारा विकसित Drought Resistant Seeds और Short Duration Crops कम बारिश में भी बेहतर उत्पादन दे सकती हैं।
Weather Apps और Technology का लाभ लें
किसान Meghdoot App और Damini App जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म का उपयोग कर मौसम की जानकारी पहले से प्राप्त कर सकते हैं। इससे बुवाई और सिंचाई की बेहतर Planning की जा सकती है।
फसल बीमा जरूर कराएं
मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है। सूखा, बाढ़ या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में इससे आर्थिक नुकसान की भरपाई संभव है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि Climate Change के कारण आने वाले वर्षों में Monsoon Pattern और ज्यादा अनिश्चित हो सकता है। इसलिए किसानों को अब Smart Farming, Water Management और Modern Technology आधारित खेती की ओर तेजी से बढ़ना होगा।
यदि समय रहते सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाए, तो कमजोर मॉनसून और महंगे डीजल जैसी चुनौतियों के बावजूद खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।
